Oont Ke Muh Mein Jeera Muhavare Ka Arth: ऊंट के मुंह में जीरा का अर्थ और वाक्य, जानें क्या है असली मतलब?

Oont Ke Muh Mein Jeera Muhavare Ka Arth: ऊंट के मुंह में जीरा का अर्थ और वाक्य प्रयोग तो हम लोगों ने बोला और सुना तो बहुत होगा, लेकिन इस मुहावरे “ऊंट के मुंह में जीरा का अर्थ और वाक्य” (Oont Ke Muh Mein Jeera Muhavare Ka Arth) सही अर्थ क्या होता है ये शायद ही बहुत से लोग जानते हों, हम यहां इस मुहावरे के अर्थ को सही तरीके से जानने का प्रयास करेंगे, जैसे कि “कोई व्यक्ति जो ज्यादा तदात में खाना खाता हो लेकिन उसे थोड़ी ही मात्रा में ही खाने के लिए चीज दी जाएं”, तो इस जगह पर“ऊंट के मुंह में जीरा” मुहावरे का प्रयोग किया जा सकता है।

Oont Ke Muh Mein Jeera Muhavare Ka Arth
Oont Ke Muh Mein Jeera Muhavare Ka Arth

Oont Ke Muh Mein Jeera Muhavare Ka Arth: मुहावरा किसे कहते हैं?

मुहावरा और उनके अर्थ के बारे में बात करें तो, – किसी खास शब्द के अर्थ को आम लोगों की की भाषा में समझाने और अपनी बात रखने के लिए जिस शव्द और वाक्य को प्रयोग में लाते हैं उसे मुहावरा कहा जाता है। इसमें वाक्य का सीधा अर्थ न निकालकर बात को घुमा फिरा कर कहा और बोला जाता है। इस तरह के मुहावरे में भाषा को थोड़ा मजाकिया अंदाज, प्रभावशाली तरीके और संक्षिप्त रूप से कहा जाता है।

Oont Ke Muh Mein Jeera Muhavare Ka Arth: मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

ऊंट के मुंह में जीरा मुहावरे का इस्तेमाल आम बोलचाल में बहुत अधिक होता है। यह मुहावरा ऊंट के मुंह में जीरा का अर्थ (Oont Ke Muh Mein Jeera Muhavare Ka Arth) को समझने का प्रयास करें तो इसका अर्थ है कि – जरूरत से बहुत कम मिलने वाली चीज या वस्तु से है। 

Oont Ke Muh Mein Jeera Muhavare Ka Arth: मुहावरे की व्याख्या

सुबह और शाम मेहनत करने वाले दिहाड़ी मजदूर के लिए दो रोटियां सिर्फ ऊंट के मुंह में जीरा के समान हैं। इससे उसका कुछ हद तक भूख तो मिट सकती है लेकिन पेट नहीं भरेगा। इस जगह पर इस मुहावरे का प्रयोग किया जा सकता है।

Oont Ke Muh Mein Jeera Muhavare Ka Arth: मुहावरे का वाक्य के प्रयोग तरीका

  1. किसी ज्यादा खाना खाने वाले व्यक्ति को अगर काम मात्रा खाने के लिये कुछ दिया जाए, तो वह ‌‌‌भुखा रहेगा, उसकी भूख नहीं मिटेगी जैसे- ऊंट के मुंह में जिरा होना।
  2. देश के मुंबई जैसे बड़े और महंगे शहर में कम पैसों में काम करके गुजरा करना आसान नहीं होगा, यहां कम आमदनी जैसे- यह ऊंट के मुंह में जीरा होना।
  3. मोहित बहुत बड़ा पेटू बनता जा रहा है, दो रोटीयों में उसका कुछ भला नहीं होगा, दो रोटियां जैसे उसके लिये ऊंट के मुंह में जीरा के समान है।
  4. राजेश बहुत मेहनती है और उसे पेट भर कर खाना न मिल पाए तो उसके लिए ये, ऊंट के मुंह में जीरा के समान होगा। 
  5. कौशल एक व्यक्ति है उसकी लंबाई 6 फुट है, लेकिन उसका वजन सिर्फ 55 किलो मात्रा है,  यह वजन उसके लिये ऊंट के मुंह में जीरा के समान है
  6. इस शहर में अस्पतालों की संख्या कम हैं तो, ये संख्या आबादी के हिसाब से ऊंट के मुंह में जीरा वाली बात है

उम्मीद की जा सकती है कि, “ऊंट के मुंह में जीरा” मुहावरे का अर्थ (Oont Ke Muh Mein Jeera Muhavare Ka Arth) आपको समझ में आ गया होगा। 

Oont Ke Muh Mein Jeera Muhavare Ka Arth
Oont Ke Muh Mein Jeera Muhavare Ka Arth

Oont Ke Muh Mein Jeera Muhavare Ka Arth: ऊंट के मुंह में जीरा का अर्थ और वाक्य पर टिप्पणी

ऊंट के मुंह में जीरा(Oont Ke Muh Mein Jeera Muhavare Ka Arth) पर अगर टिप्पणी की जाए तो यह एक बहुचर्चित कहावत मानी जाती है, जिसका मतलब होता है जरूरत से बहुत कम मिलना या प्राप्त होना।

“ऊंट के मुंह में जीरा” एक और उदाहरण लिया जाए तो, यदि आप अपने पिता से फोन खरीदने के लिये पैसों की मांग करते हैं, फोन की कीमत 20,000 रुपए है, लेकिन आपके पिता ने फोन खरीदने के लिये सिर्फ 5,000 रुपए ही दिए हैं तो, इसे ऊंट के मुंह में जीरा कहेंगे। मतलब ये कि जितना चाहिए, जितनी जरूरत है उसकी तुलना में बहुत कम मिलना या प्राप्त होना।

Oont Ke Muh Mein Jeera Muhavare Ka Arth: ऊंट के मुंह में जीरा मुहावरे की कहानी (story on idiom oont ke muh mein jeera in Hindi)

पुराने समय की बात है, किसी इलाके में एक राजा रहता था। वह राजा बहुत ही कंजूस किस्म का। उसके घर में उसकी पत्नी और उसका बेटा भी साथ में रहा करता था। राजा के ‌‌‌दरबार में अनेक सैनिक थे, लेकिन वे सैनिक केवल दिखावे के ही तौर पर तैनात थे, उनमें जान बिलकुल भी नहीं थी, वे कोई भी युद्ध लड़कर जीत नहीं सकते थे।

राजा के पास धन और दौलत की कोई कमी नहीं थी। उसने कई राज्यों को जीत लिया था। और सभी राज्य राजा हुक्म की तामील करते थे। उस राज्य के सैनिक भी राजा के कहने पर हमेशा तैयार रहते थे, लेकिन राजा के खुद के राज्य के अलावा अन्य राज्य के सैनिक बहुत ही बलवान थे। राजा के सैनिकों की संख्या दस हजार से भी अधिक थी।

‌‌‌जब भी राजा के पास कोई मेहमान बनकर आता था, तो राजा उसे भोजन तो कराता था, लेकिन भोजन बन नाम मात्रा का ही होता था। एक आदमी को तीन रोटी से अधिक कभी भी नहीं दी जाती थी। इसी वजह से जो भी दूसरे राज्य के लोग राजा के पास एक बार आने के बाद दोबारा कभी नहीं आते थे।

राजा के पास से लौटकर वे अपने राज्य के लोगों को कहा करते की वह राजा तो ‌‌‌पेट ‌‌‌भर कर खाना भी नहीं देता है, सिर्फ नाम का भोजन करवा कर वापस लौटा देता है। ना जाने वह अपने सैनिकों को क्या खिलाता होगा। उसके सैनिक भी मरने के समान हो रहे हैं । लेकिन उन लोगों को भी क्या पता था कि राजा अपने सैनिकों को भी दो रोटियों से अधिक कभी भी नहीं देता है।

Oont Ke Muh Mein Jeera Muhavare Ka Arth
Oont Ke Muh Mein Jeera Muhavare Ka Arth

राजा अपने सैनिकों को पैसे भी कम दिया करता था। जिसकी वजह से अनेक सैनिक उस ‌‌‌राजा को छोड़कर दुसरा काम करने को मजबूर हो गए थे। इसी वजह से राजा के सैनिकों की सख्या भी गिरती जा रही थी। पर राजा को इस बात से कोई भी ‌‌‌फर्क नहीं पड़ रहा था। लोग कहा करते थे कि राजा अपने सैनिको और मेहमानों को जो भी भोजन देता है वह तो ऊंट के मुंह में जीरा के समान है।

यहां तक की राजा अपने बेटे को भी भर पेट खाना नहीं खिलाता था। उसे भी पांच रोटियां ही देता था, जिसकी वजह से वह सिर्फ कुछ समय तक ही अपनी भूख रोक लेता था। ‌‌‌राजा के ऐसा करने से ‌‌‌बेटे को भी बहुत खराब लग करता था। वह कभी कभी कभी बोल भी देता था कि आप मुझे और अपने सैनिकों को पेट भर कर खाना नहीं देते हो। भूख के नाम पर आप का काम तो ऊंट के मुंह मे जिरा वाली बात है। 

 

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